अल्प विराम

Monday, January 12, 2009

तमन्ना

कभी यह होता तो कैसा होता .....

हम हर पल मुस्कुराते

वो आंसू बहाते

भूल जाते हम सभी वादे

वो हमारी याद में ख़ुद को भुलाते

कभी यह होता तो कैसा होता .....

हम हर पल महफिल सजाते

वो पथराई आंखों से करते इंतजार

रात भर हम सपनो में खोते

वो खुली आंखों से करते तारों से बात

कभी यह होता तो कैसा होता .....

हम बेखबर , अनजान बनते

वो आ आकर करते अपना हाल बया

हम देख कर भी अनदेखा करते

वो छिप छिप कर भरते आहें हर बार

5 Comments:

  • At 1:24 AM, Blogger विनय said…

    बहुत सुन्दर रचना है,

    ---मेरा पृष्ठ
    चाँद, बादल और शाम

     
  • At 2:22 AM, Blogger Dwiti said…

    bahut sundar..

     
  • At 8:33 AM, Blogger विनय said…

    मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
    मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

    -----नयी प्रविष्टि
    आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
    तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

     
  • At 6:16 AM, Blogger MUFLIS said…

    bahut achhi nazm hai,,,,
    bahaavnaaeiN aur umangeiN dono ka
    sundar smavesh jhalak rahaa hai.
    aapki next post ka intzaar rahega
    ---MUFLIS---

     
  • At 4:41 AM, Blogger नीरज कुमार said…

    हम बेखबर , अनजान बनते
    वो आ आकर करते अपना हाल बया
    हम देख कर भी अनदेखा करते
    वो छिप छिप कर भरते आहें हर बार

    नवगीत की पाठशाला से यहाँ आया...
    बहुत ही सुन्दर रचनाएँ पढ़ने को मिलीं...
    हर्षित हो गया मन...
    धन्यवाद...

     

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