Wednesday, April 17, 2019

पीड़ा






44 comments:

  1. बेहतरीन रचना सखी

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    1. सादर आभार सखी।

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  2. आपकी रचनाएं, चाहे वे छंदबद्ध हों अथवा कविता के पारंपरिक नियमों से परे जाती हुईं, अत्यंत स्वाभाविक रूप से प्रवाहमय लगती हैं एवं मुझे सुमित्रानंदन पंत जी की अमर पंक्तियों का स्मरण कराती हैं - 'वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान; निकल कर आँखों से चुपचाप बही होगी कविता अनजान'।

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    1. सादर आभार आदरणीय माथुर जी ।

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  3. सुंदर रचना दीपशिखा जी !

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    1. सस्नेह धन्यवाद नीरज ।

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार १९ अप्रैल २०१९ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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    1. सादर आभार आदरणीया ।

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  5. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (19-04-2019) को "जगह-जगह मतदान" (चर्चा अंक-3310) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. सादर आभार आदरणीय डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री जी ।

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  6. वाह!!!
    बहुत ही सुन्दर ...लाजवाब रचना।

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  7. सुन्दर रचना दीपशिखा जी ।

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    1. सादर आभार आदरणीया ।

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  8. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 18/04/2019 की बुलेटिन, " विश्व धरोहर दिवस 2019 - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. सादर आभार आदरणीय ।

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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    1. सादर आभार आदरणीय ।

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  10. वाह .... खूबसूरत अंदाज़

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    1. सादर आभार आदरणीय ।

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  11. बेहतरीन प्रिय सखी 👌
    सादर

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    1. सस्नेह धन्यवाद सखी ।

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  12. बहुत सुंदर भाव पूर्ण क्षणिकाएं अंतर तक उतरती ।
    अप्रतिम।

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  13. मन की वीणा के स्वर शब्दों से निकल रहे हैं ...
    सुन्दर लम्हों को बाँध के लिखी रचना है ...

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    1. सादर आभार आदरणीय दिगम्बर जी ।

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  14. बेहतरीन अभिव्यक्ति..

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    1. सादर आभार आदरणीया ।

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  15. गहरी संवेदनाये लिए बहुत ही सुंदर रचना....

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    1. सादर आभार आदरणीया ।

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  16. वाह ! शब्द, शिल्प, शैली और प्रवाह ... सभी तरह से उच्चकोटि की रचना। सुंदर।

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    1. सस्नेह धन्यवाद सखी ।

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  17. वाह .... खूबसूरत अंदाज़ दीपशिखा जी

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  18. सादर आभार संजय जी ।

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  19. वा व्व बहुत ही खूबसूरत रचना,दीपशिखा दी।

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  20. Very well written. Lovely lines.

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  21. नि:शब्‍द हूं ये पढ़कर, नई कविता ने छंदों से नाता तोड़ सा दिया था। धन्‍यवाद दीपशिखा जी

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    1. सादर आभार आदरणीय ।

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  22. सचमुच निशब्द करने वाली शैली | मुझे तो अनायासमहादेवी जी का स्मरण हो आता है | सस्नेह शुभकामनायें सखी | आपकी रचनाएँ अनमोल हैं |

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    1. सस्नेह धन्यवाद सखी ।

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  23. आपकी लेखनी मुझे महान कवित्री महादेवी वर्मा की याद दिला देती है। हिंदी के शब्दों का प्रयोग करना आपसे सीखने लायक है।

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    1. सादर आभार आदरणीय ।

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ओ पाहुन.....