Friday, June 12, 2020

ओ पाहुन.....






28 comments:

  1. अप्रतिम...प्रेम का अनहद नाद।
    बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढ़ने मिली दीपा जी मन प्रसन्न हुआ।

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    1. सादर आभार आदरणीया श्वेता जी ।

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (१३-0६-२०२०) को 'पत्थरों का स्रोत'(चर्चा अंक-३७३१) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    --
    अनीता सैनी

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    1. सस्नेह धन्यवाद सखी ।

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  3. बहुत सुंदर अभिसार गीत! बधाई और आभार!!!

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    1. सादर आभार सर ।

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  4. बहुत सुन्दर और भावप्रवण।

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    1. सादर आभार आदरणीय डॉ साहब ।

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  5. आपकी रचनाएं अद्भुत होती हैं दीपशिखा जी । इनके शब्दों को पढ़ लेना ही पर्याप्त नहीं होता । इनके तो अक्षर-अक्षर को अनुभूत करना होता है जिसके उपरान्त वे किसी भावुक हृदय की गहनता में जाकर ओझल हो जाते हैं ।

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    1. सादर आभार आदरणीय माथुर जी । सर आपकी प्रतिक्रिया व सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार । निसन्देह आपके द्वारा की गई हर टिप्पणी मेरा मार्गदर्शन करती है ।

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  6. सच कहा है सभी ने बहुत ही सुंदर रचना है, बधाई हो

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    1. स्स्नेह आभार ।

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  7. भावपूर्ण अप्रितम लेखन दीपा जी | मधुर सुकोमल शब्दावली बहुत मनमोहक है |

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    1. सस्नेह धन्यवाद प्रिय रेणु जी ।

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    1. सस्नेह धन्यवाद ।

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  9. बहुत सुंदर।

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    1. सस्नेह धन्यवाद प्रिय ज्योति ।

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  10. बहुत सुंदर और भावपूर्ण रचना ।

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  11. बहुत सुंदर रचनाए है आपकी
    हाल ही में मैंने ब्लॉगर ज्वाइन किया है आपसे निवेदन है कि आप मेरे ब्लॉग पढ़े और मुझे सही दिशा निर्देश दे
    https://poetrykrishna.blogspot.com/?m=1
    Dhnyawad

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    1. sure dear..I wish you all the best.

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  13. पाहुन से मनप्राण संवाद ... क्या बात है दीपा जी... बहुत खूब

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ओ पाहुन.....