अल्प विराम

Monday, January 12, 2009

तमन्ना

कभी यह होता तो कैसा होता .....

हम हर पल मुस्कुराते

वो आंसू बहाते

भूल जाते हम सभी वादे

वो हमारी याद में ख़ुद को भुलाते

कभी यह होता तो कैसा होता .....

हम हर पल महफिल सजाते

वो पथराई आंखों से करते इंतजार

रात भर हम सपनो में खोते

वो खुली आंखों से करते तारों से बात

कभी यह होता तो कैसा होता .....

हम बेखबर , अनजान बनते

वो आ आकर करते अपना हाल बया

हम देख कर भी अनदेखा करते

वो छिप छिप कर भरते आहें हर बार