Wednesday, April 07, 2010

“ढाई आखर प्रेम का”


एक प्रेमी
प्रेमिका से
करने आया था मुलाकात
“वेलेन्टाइन डे” की थी वो रात
प्रेमी ने प्रेमिका को था
कुछ ऐसे पकड़ा
मानो नन्हे शिशु को
माँ ने हो बांहों में जकड़ा

बिन बोले
आंखोँ में आंखें डाल
वो कर रहे थे
सार्थक मुलाकात
प्रेमिका बीच बीच में
अपने प्रेमी के
हाव भावों को थी तोलती
अंधेरे में जैसे
किसी वस्तु को टटोलती

तभी प्रेमी ने निकाल
एक कागज का पुर्जा
हौले से
प्रेमिका की ओर बढ़ाया
अपने मनोभावों को था
वह उसमें उतार लाया
थी चमक
आँखों में ऐसी
जैसे कुछ अनकहा
हो आज कहने आया


प्रेमिका ने
बड़ी नजाकत से
उस पु्र्जे को
उलट पुलट घुमाया
तेज निगाहों को
विषयवस्तु पर दौड़ाया
"दिल" "चाहत" प्यार" का
बस जिक्र उसमें पाया
था अफसोस
"आज के दिन" भी
वह खाली हाथ ही था आया

निराशा ने
कोमल मन को दुखाया
चंचल नयनोँ में
स्वतः जल भर आया
अपनी चिर परिचित अदा से
बंद होँठों को
पहली बार उसने हिलाया
और धीरे से
कुछ यूं बुदबुदाया
"कहती है दुनिया जिसे प्यार
बस एक हवा का
झोंका है
महसूस तो होता है
छूना चाहो तो धोखा है
कहने वाले ने
सच ही कहा है शायद
प्यार वो फूल है
जो हर दिल के
चमन में है खिलता
हैं वो खुशनसीब
जिनके प्यार को प्यार है मिलता

ना जाने कैसे
प्रेमी को
अचानक कुछ याद आया
छुपा कर रखा था
जो रहस्य अब तक
बंद हथेली में
प्रेमिका के पास लाया

खोली हथेली तो
हीरे की चमक से
चमकी प्रेमिका की आँखें
बोली वह कुछ शरमाकर
कितने बुद्धु हो
छुपा कर रखा था
जो यूं अपना प्यार
अब तक
खाओ कसम कि
फिर ना यूं
आँख मिचौली खेलोगे
जब भी आएगा
यह मुबारक दिन अबसे
यूं ही
मनमोहक अदा से
"ढाई आखर प्रेम का" बोलोगे









4 comments:

Shekhar kumawat said...

YAHI BAT TO SARI DUNAYA NAHI SAMJH PATI HE

PYAR HI TO SABSE ANMOL HE



SHAKHE KUMAWAT

http://kavyawani.blogspot.com/

विजयप्रकाश said...

बहुत खूब...प्रेमिका की भावनाओं को बढ़िया अभिव्यक्ति दी है आपने.

Arun Hande said...

अाज का प्रेम...
बहोत खुब...

Arun Hande said...

अाज का प्रेम...
बहोत खुब...