Monday, November 23, 2009

इंतजार


सोचते हैं कि ये हमने क्या किया
क्यूँ किसी बेवफा को दिल दिया

ताउम्र बिता दी
उसके इंतजार में
पल भर को भी
सपनों में
न जो मिला किया
लुटादी उसके प्यार में
हमने हर खुशी
जो हर गम से अपने
बेखबर बना रहा
किया इंतजार उस का
पल पल गिन कर
बड़ी बेरूखी से जिसने
सब कुछ भूला दिया
खुळी आँखों में सजाए
सपनें सजीले
इंतजार के नाम पर
फिर खुद से दगा किया

5 comments:

M VERMA said...

खुळी आँखों में सजाए
सपनें सजीले
इंतजार के नाम पर
फिर खुद से दगा किया
सपने अक्सर दगा दे ही जाते हैं
सुन्दर रचना

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!

दिगम्बर नासवा said...

सोचते हैं कि ये हमने क्या किया
क्यूँ किसी बेवफा को दिल दिया

सच लिखा है ........ किसी बेवफा को दिल दे कर दुःख, दर्द के सिवा कुछ नहीं मिलता ..... लाजवाब लिखा है .....

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छी रचना है। भाव, विचार और शिल्प सभी प्रभावित करते हैं। सार्थक और सारगर्भित प्रस्तुति ।

मैने अपने ब्लग पर एक कविता लिखी है-रूप जगाए इच्छाएं-समय हो पढ़ें और कमेंट भी दें ।- http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

गद्य रचनाओं के लिए भी मेरा ब्लाग है। इस पर एक लेख-घरेलू हिंसा से लहूलुहान महिलाओं को तन और मन लिखा है-समय हो तो पढ़ें और अपनी राय भी दें ।-
http://www.ashokvichar.blogspot.com

संजय भास्कर said...

... लाजवाब लिखा है .....