अल्प विराम

Monday, November 23, 2009

इंतजार


सोचते हैं कि ये हमने क्या किया
क्यूँ किसी बेवफा को दिल दिया

ताउम्र बिता दी
उसके इंतजार में
पल भर को भी
सपनों में
न जो मिला किया
लुटादी उसके प्यार में
हमने हर खुशी
जो हर गम से अपने
बेखबर बना रहा
किया इंतजार उस का
पल पल गिन कर
बड़ी बेरूखी से जिसने
सब कुछ भूला दिया
खुळी आँखों में सजाए
सपनें सजीले
इंतजार के नाम पर
फिर खुद से दगा किया

5 Comments:

  • At 3:34 AM, Blogger M VERMA said…

    खुळी आँखों में सजाए
    सपनें सजीले
    इंतजार के नाम पर
    फिर खुद से दगा किया
    सपने अक्सर दगा दे ही जाते हैं
    सुन्दर रचना

     
  • At 7:16 PM, Blogger Udan Tashtari said…

    बहुत उम्दा!

     
  • At 8:55 PM, Blogger दिगम्बर नासवा said…

    सोचते हैं कि ये हमने क्या किया
    क्यूँ किसी बेवफा को दिल दिया

    सच लिखा है ........ किसी बेवफा को दिल दे कर दुःख, दर्द के सिवा कुछ नहीं मिलता ..... लाजवाब लिखा है .....

     
  • At 11:11 AM, Blogger dr. ashok priyaranjan said…

    बहुत अच्छी रचना है। भाव, विचार और शिल्प सभी प्रभावित करते हैं। सार्थक और सारगर्भित प्रस्तुति ।

    मैने अपने ब्लग पर एक कविता लिखी है-रूप जगाए इच्छाएं-समय हो पढ़ें और कमेंट भी दें ।- http://drashokpriyaranjan.blogspot.com

    गद्य रचनाओं के लिए भी मेरा ब्लाग है। इस पर एक लेख-घरेलू हिंसा से लहूलुहान महिलाओं को तन और मन लिखा है-समय हो तो पढ़ें और अपनी राय भी दें ।-
    http://www.ashokvichar.blogspot.com

     
  • At 1:13 AM, Blogger संजय भास्कर said…

    ... लाजवाब लिखा है .....

     

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